0 विधायिका जरूरी तथ्य – Soft Study Akash Kumar

विधायिका जरूरी तथ्य

 

आपने पिछले पाठ में संघीय कार्यपालिका और राज्य कार्यपालिका के बारे में पढ़ा जो विधायिका क्रमशः संसद और राज्य विधान मण्डल के प्रति उत्तरदायी हैं। संघीय विधायिका अर्थात संसद में राष्ट्रपति एवं संसद के दोनों सदन; लोक सभा और राज्य सभा सम्मिलित होते हैं। लोक सभा; जिसे निम्न सदन भी कहते हैं, लोगों का सदन होता है जिसके सदस्यों का चुनाव सोधे जनता (लोगो) द्वारा किया जाता है। राज्य सभा उच्च सदन है जो भारतीय संघ के राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है और जिसके सदस्यों का चुनाव विधान सभाओं तथा संघीय क्षेत्रों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। भारत का राष्ट्रपति भी भारतीय संसद का अभिन्न अंग है यद्यपि वह किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता। इसी प्रकार राज्यपाल भी राज्य विधायिका का अभिन्न अंग होता राज्य विधान मण्डल द्विसदनीय व एक सदनीय दोनों ही तरह के हैं। जहां द्विसदनीय विधानपालिका है वहां निम्न सदन को विधान सभा और उच्च सदन को विधान परिषद कहते हैं। इस पाठ में हम केन्द्र तथा राज्यों की विधायी इकाइयों के बारे में अध्ययन करेंगे।

उद्देश्य इस पाठ को पढ़ने के बाद आप

• समझ सकेंगे कि भारत का राष्ट्रपति भारतीय संसद का अभिन्न अंग है; • संघीय तथा राज्य विधायिका के संगठन का वर्णन कर पायेगें;

● भारतीय संसद तथा राज्य विधायिका को विभिन्न शक्तियों तथा कार्यों की व्याख्या

कर सकेंगे:

समझ सकेंगें कि लोक सभा किस प्रकार राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है;

● साधारण और धन विधेयक में अन्तर कर पाएगे;

संसद की विधि निर्माण की प्रक्रिया समझ सकेंगे; तथा

संसद की कार्य और शक्तियों की राज्य विधान मण्डलों की कार्य और शक्तियों से

तुलना कर सकेंगे।

कानून एक परिचय

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मॉड्यूल 6

विधायिका

भारत का संविधान ॥

22.1 संसद का संगठन

भारतीय संसद में भारत का राष्ट्रपति तथा दोनों सदन, लोक सभा और राज्य सभा सम्मिलित होते हैं। लोक सभा के सदस्यों का चुनाव सीधे लोगों द्वारा किया जाता है और राज्य सभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।

टिप्पणी

चित्र 22.1 संसद भवन, नई दिल्ली

22.1.1 राज्य सभा सदस्यता और निर्वाचन

भारत की संविधान सभा संघवाद के सिद्धान्तों को मस्तिष्क में रख कर राज्यों के अधिकारों एवं विशेषाधिकारों की सुरक्षा के लिए राज्य सभा की आवश्यकता पर एकमत थी। राज्य सभा के सदस्यों की कुल संख्या 250 से अधिक नहीं हो सकती। उनमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा और खेलों के क्षेत्र में उत्कृष्टता के आधार पर मनोनीत करता है। शेष सदस्यों को राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा निर्वाचित करते हैं। अमेरीकी सीनेट के विपरीत जहां 50 राज्यों से एक समान दो सदस्य आते हैं वहां भारत के राज्यों की परिषद् अर्थात राज्य सभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व एक समान नहीं होता। विभिन्न राज्यों से सदस्यों की संख्या उस राज्य की जनसंख्या के अनुपात में होती

22.1.2 योग्यता, कार्यकाल वेतन और भत्ते

राज्य सभा का सदस्य बनने के लिए आवश्यक योग्याताएं नीचे दी गई है

1. भारत का नागरिक होना चाहिए

2. उसकी आयु 30 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए

3. समय-समय पर संसद द्वारा निर्धारित योग्याएं पूरी करता हो।

4. मानसिक रूप से अस्वस्थ दीवालिया अथवा केन्द्र या राज्य सरकार में लाभ
22.1.4 वेतन और भने

राज्य सभा के प्रत्येक सदस्य को मासिक वेतन तथा चुनाव क्षेत्र भत्ता मिलता है। इसके साथ ही उन्हें अनेक अन्य लाभ जैसे निशुल्क आवास, पानी, बिजली, टेलिफोन और यात्रा सुविधाएं मिलती हैं। सेवा निवृत होने पर राज्य सभा के सदस्य मासिक पेंशन पाने के अधिकारी होते हैं।

22.1.5 राज्य सभा के पदाधिकारी

भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन अध्यक्ष है जिसे सभापति कहा जाता है। सदन अपने सदस्यों में से किसी एक को उप सभापति निर्वाचित करता है। उपराष्ट्रपति राज्य सभा का सदस्य नहीं होता इसलिए वह केवल अनिर्णय की स्थिति में मतदान कर सकता है। सभापति के कार्य लगभग लोकसभा के स्पीकर (अध्यक्ष) के समान हो हैं।

पाठगत प्रश्न 22.1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये।

(i) राज्य सभा को स्थायी सदन क्यों कहा जाता है? (ii) अमेरीकी सीनेट और राज्य सभा में आधारभूत अन्तर क्या है? (iii) राज्य सभा के सदस्यों को कौन चुनता है?

22.1.6 लोकसभा सदस्यता और चुनाव

लोकसभा, जिसे निम्न सदन भी कहा जाता है, के सदस्यों की संख्या 550 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इनमें से अधिकतम 530 सदस्यों को राज्यों से निर्वाचित किया जाएगा और अधिकतम 20 को केन्द्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित किया जा सकता है। लोकसभा की वर्तमान निर्वाचित सदस्य संख्या 543 है। यदि एंग्लो इन्डियन समुदाय के सदस्यों को उपयुक्त प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता तो राष्ट्रपति इस समुदाय के दो भारतीय सदस्यों को लोकसभा के लिये मनोनीत कर सकता है। लोकसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए स्थान आरक्षित होते हैं। इन चुनाव क्षेत्रों से उम्मीदवार अनुसूचित जातिया अनुसूचित जनजाति का हो होना चाहिए जिस भी वर्ग के लिये सीट आरक्षित है, लेकिन मतदाताओं का संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र होता है अर्थात सभी पात्र मतदाना जाति, वंश अथवा समुदाय के भेदभाव के बिना चुनावों में भाग लेते हैं।

कानून एक परिचय

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मॉड्यूल – 6

विधायिका

भारत का संविधान ॥

लोकसभा के लिए चुनाव सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार के आधार पर किया जाता है। इस के लिए मतदान करने की आयु 18 वर्ष अथवा उससे अधिक निश्चित की गई है। चुनाव गुप्त मतदान द्वारा इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ई. वी. एम.) के माध्यम से साधारण बहुमत पर आधारित होता है अर्थात सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले को निर्वाचित घोषित किया जाता है।

टिप्पणी

चित्र 22.2: इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन

22.1.7 योग्यता, कार्यकाल और भने

• योग्यता

लोकसभा का सदस्य बनने के लिए व्यक्ति को

1. भारत का नागरिक होना चाहिए जिसकी आयु 25 वर्ष या उससे अधिक हो 2. भारत के किसी निर्वाचन क्षेत्र से मतदाता के रूप में पंजीकृत होना चाहिए। 3. यदि किसी आरक्षित चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ता है तो वह अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति जिस वर्ग के लिये सीट आरक्षित है, से सम्बद्ध हो। 4. ऐसी अन्य योग्यताएं पूरी करता हो जो समय-समय पर कानून द्वारा संसद निर्धारित करे।

22.1.8 कार्यकाल

लोकसभा का कार्यकाल पाच वर्ष है। राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा होने से पहले भी इसे भग कर सकता है। आपातकाल के दौरान कार्यकाल एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है परन्तु आपातकाल समाप्त होने के बाद 6 मास से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।

22.1.9 लोकसभा के पदाधिकारी

लोकसभा के सभापति को अध्यक्ष कहा जाता है। सदन में एक उपाध्यक्ष का प्रावधान भी है। दोनों का निर्वाचन लोक सभा के सदस्य अपने में से ही करते हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को सदन द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर अपने पद से हटाया जा सकता

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विधायिका

लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के कार्य और शक्तियां राज्य सभा के सभापति और उपसभापति के सामन ही हैं उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

(i) सदन की बैठकों की अध्यक्षता करना, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखना प्रश्न पूछने तथा अपनी बात सदन के समक्ष रखने लिए समय देना।

(ii) अध्यक्ष की अनुमति के बिना सदन में कोई प्रस्ताव, प्रतिवेदन अथवा विधेयक प्रस्तुत

नहीं किया जा सकता।

(iii) यदि कोई सदस्य दुर्व्यवहार करता है तो अध्यक्ष उसको चेतावनी दे सकता है और सदस्य को सदन से बाहर जाने को कह सकता है और बलपूर्वक भी बाहर करवा सकता है

(iv) अव्यवस्था, अनुशासनहीनता और गणपूर्ति न होने पर सदन को स्थगित करना (v) लोक सभा का अध्यक्ष वित्त (धन) विधेयक के विषय में निर्णय लेने वाला एकमात्र अधिकारी हैं अर्थात कोई विधेयक वित्त विधेयक है कि नहीं इस पर उसका निर्णय अन्तिम होता है।

(vi) सदस्यों के अधिकारों को सभी प्रकार के अतिक्रमणों से बचाना तथा उनके विशेषाधिकारों

की रक्षा करना।

(vii) दोनों सदनों के बीच असहमति की स्थिति में जब कभी दोनों सदनों का संयुक्त

अधिवेशन होता है तो लोकसभा का अध्यक्ष ही उस अधिवेशन की अध्यक्षता करता

है।

(viii) सदन में दर्शकों के प्रवेश को नियमित करना ।

पाठगत प्रश्न 22.2

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:

(क) किस समुदाय को अपर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने पर राष्ट्रपति उस समुदाय के सदस्यों को लोक सभा में मनोनीत कर सकता है?

(ख) संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता कौन करता है? (ग) भारत के ऐसे तीन राज्यों के नाम लिखिए जिनके लोक सभा में सबसे कम सदस्य होते हैं?

(घ) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा की कार्यवाही कौन चलाता है?

22.2 संसद के कार्य

भारतीय संसद विधायी कार्यपालिका सम्बन्धी वित्तीय, चुनावी तथा अन्य अनेक कार्य करती है। आइये हम इन कार्यों को विस्तारपूर्वक जानें।

कानून एक परिचय

विधायिका

A. विधायी कार्य एवं शक्तियां

संसद का मुख्य कार्य पूरे देश के लिए संघ सूची, समवर्ती सूची तथा विशेष परिस्थितियों में राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बनाना है। संसद को संघ सूची में उल्लिखित 97 विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है। इसके पास समवर्ती सूची में दर्ज 47 विषयों पर भी राज्यों के साथ कानून बनाने का अधिकार हैं यदि समवर्ती सूची के एक ही विषय पर संसद और राज्य विधान मण्डल; दोनों ही कानून बनाते हैं तो विवाद की स्थिति में केन्द्र द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होगा। ऐसे विषय, जिनका जिक्र तीन में से किसी भी में नहीं है, को अवशिष्ट शक्तियां कहा जाता है। केवल संसद को ही इन पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

संसद में प्रस्तुत किए गए सभी विधेयकों को दोनों सदनों द्वारा पारित करने के पश्चात राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की सहमति के बाद ही विधेयक कानून बनता है।

B. कार्यपालिका सम्बन्धी कार्य एवं शक्तियां

संसदीय प्रणाली में शासन प्रशासन चलाने वाली कार्यपालिका को संसद का विश्वास अवश्य प्राप्त होना चाहिए विशेषतः लोकसभा में जहां लोगों के प्रतिनिधि होते हैं। प्रधानमंत्री तथा मंत्री परिषद व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से संसद के निम्न सदन के प्रति उत्तरदायी हैं। संसद कार्यपालिका पर नियन्त्रण रखती है और यह सुनिश्चित करती है कि कार्यपालिका अपने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन न करे और संसद के प्रति उत्तरदायी बनी रहे। संसद निम्न प्रकार से कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है।

(i) दोनों सदनों के प्रत्येक कार्य दिवस का पहला एक घण्टा प्रश्न और पूरक प्रश्न पूछने के लिये प्रयोग किया जाता है। इससे सदस्य किसी भी मुद्दे से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सम्बन्धित मन्त्री को पहले से भेजे गए प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इस निश्चित घण्टे को प्रश्न काल कहते हैं।

(ii) संसद अपने सदस्यों को किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त अवसर

प्रदान करती है। इससे विपक्षी सदस्यों को सरकार की आलोचना करने तथा सत्ताधारी

दल के सदस्यों को समर्थन व बचाव करने का अवसर मिलता है।

(iii) संसद विभिन्न प्रस्तावों के माध्यम से कार्यपालिका पर नियन्त्रण रखती है जैसे

स्थगन प्रस्ताव

ध्यानाकर्षण

प्रस्ताव

कार्यपालिका

अविश्वास प्रस्ताव

प्रश्न काल

वार्षिक बजट

पारित करना

(a) स्थगन प्रस्ताव संसद का कोई भी सदस्य किसी आवश्यक मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद में स्थगन प्रस्ताव ला सकता है। यदि लोकसभा अथवा राज्य सभा का अध्यक्ष प्रस्ताव को स्वीकार कर ले उस मुद्दे पर पूरी बहस की अनुमति होती है।

कानून एक परिचय

मॉड्यूल – 6

भारत का संविधान II

कोर्ट

विधायिका

(b) ध्यानाकर्षण प्रस्तावः जब कभी जनहित से सम्बन्धित कोई आवश्यक मुद्दा सामने आता है तो संसद में सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है।

(c) आधे घण्टे की चर्चा: यह सदस्यों को किसी विषय पर सरकार को घेरने का एक अन्य अवसर प्रदान करती है। (d) वार्षिक बजट पारित करना: इसमें ऐसी चर्चा शामिल होती हैं जहां विपक्ष को पूरी सरकार की आलोचना करने का सबसे अच्छा मौका मिलता है। बजट को स्वीकार न करना सरकार में अविश्वास की अभिव्यक्ति है।

(e) अविश्वास प्रस्तावः यह प्रस्ताव केवल लोक सभा के सदस्यों द्वारा ही लाया जा सकता है। लोक सभा का कोई भी सदस्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मन्त्रिपरिषद् के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है। इस अवसर पर अधिकांश विपक्षी सदस्य सरकार की कमियों और त्रुटियों को प्रस्तुत कर सरकार पर नियन्त्रण बनाने अथवा जनता की नजरों में गिराने की कोशिश करते हैं। सत्ता दल उठाए गए प्रश्नों का उत्तर देता है और अपने को बचाता है। जब तक सत्ता पार्टी के पास बहुमत होता है जब तक उसे हार का खतरा नहीं होता। वास्तव में यह शक्ति परीक्षण होता है विशेष रूप से गठबन्धन की सरकारों के लिए।

C. वित्तीय कार्य एवं शक्तियां

संसद जनता के पैसों की संरक्षक है। संसद की स्वीकृति के बिना कोई टैक्स नहीं लगाया जा सकता और न ही कोई पैसा खर्च किया जा सकता है। इसलिए संसद द्वारा वार्षिक बजट स्वीकार किया जाता है। लेकिन वास्तविक वित्तीय शक्ति लोक सभा के पास है। संविधान के अनुसार धन विधेयक को केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। लोकसभा से पारित होने के बाद इसको राज्य सभा में विचारार्ध भेजा जाता है। राज्य सभा को 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिश अथवा बिना सिफारिश के धन विधेयक को वापस भेजना होता है। लोक सभा, राज्य सभा की सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं और इस प्रकार राज्य सभा की असहमति के बावजूद धन विधेयक को पारित समझा जाता है।

D. चुनावी कार्य एवं शक्तियां

संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य भारत के राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मण्डल के सदस्य होते हैं। इसके अतिरिक्त लोक सभा के सदस्य अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनते हैं जबकि राज्य सभा के सदस्य केवल अपना उपसभापति चुनते हैं।

E. संविधान संशोधन सम्बन्धी कार्य एवं शक्तियां

भारत की संसद संविधान के प्रावधानों में संशोधन करने का अधिकार रखती है; यद्यपि भारत के संघीय ढांचे के कारण अनुच्छेद 368 में निर्धारित विधि के अनुसार ही इस कानून एक परिचय

मॉड्यूल – 6 भारत का संविधान II

शक्ति का सीमित ढंग से प्रयोग किया जा सकता है। किसी संशोधन वि के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। प्रत्येक सदन में पारित होने के बाद इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा संविधान के अधिकांश भारों को विशेष बदमन से संशोधित किया जाना

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