0 लोकतंत्र और चुनाव – Soft Study Akash Kumar

लोकतंत्र और चुनाव

लोकतंत्र और चुनाव

आधुनिक प्रजातांत्रिक राज्यों में प्रतिनिधि सरकार है। आधुनिक प्रजातांत्रिक राज्यों के लम्बे आकार और जनसंख्या के कारण सरकार के एक रूप में प्रत्यक्ष लोकतंत्र का प्रयोग कठिन हो जाता है। फिर भी सभी आधुनिक लोकतंत्रों में अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधि सरकारें है, जिन्हें लोगों के द्वारा चुना जाता है। ये प्रतिनिधि चुनाव के माध्यम से लोगों के द्वारा चुने जाते हैं। इस प्रकार चुनाव आधुनिक प्रतिनिधि लोकतंत्र के निर्माण में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लोकतंत्र

चुनाव लोगों का समर्थन पाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला होता है। कभी कभी एक व्यक्ति भी स्वतंत्र उम्मीदवार की तरह चुनाव लड़ सकता है।

पार्टी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के फायदे निम्न हैं

1) राजनीतिक दल विशिष्ट नीतियों का अनुसरण करते हैं, अतः, जब एक उम्मीदवार दल का प्रतिनिधि होता है मतदाताओं के लिए जानना आसान हो जाता है कि उसके

कार्यक्रम क्या है।

i) पार्टी उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार आयोजित करने के लिए राजनीतिक दलों से कोष प्राप्त होता है।

ii) उम्मीदवार को चुनाव के दौरान पार्टी के द्वारा कार्यकर्ताऐं दिये जाते हैं। iv) पार्टी के लोकप्रिय नेता दल उम्मीदवारों के लिए प्रचार करते हैं तथा उनकी चुनाव

रैलियों को संबोधित करते हैं।

22.6.1 चुनाव प्रक्रिया

प्रजातांत्रिक प्रणाली में चुनाव समानता के सिद्धांत पर आधारित होता है, उदाहरणार्थ एक व्यक्ति एक मत सभी व्यक्तियों को बिना जाति, रंग, मत, लिंग, या धर्म के भेदभाव के खास राजनीतिक अधिकार प्राप्त है। इन अधिकारों में सबसे महत्त्वपूर्ण अधिकार मत देने का अधिकार है। राजनीति में प्रत्येक को समान अधिकार प्राप्त है प्रत्येक व्यक्ति को सरकार के गठन में समान हक है।

गुप्त मतपत्र मतदाता एक घेरे में अपने मत का प्रयोग गुप्त रूप से करते हैं, ताकि कोई भी उनके चयन को नहीं जान सके प्रतिनिधि लोकतंत्र में गुप्त मतदान को प्रश्रय दिया जाता है; अन्यथा, मतदाता धमकी तथा अनुचित प्रभाव के भय से अपने चयन का खुले रूप से प्रदर्शन नहीं कर सकते।

निर्वाचन क्षेत्र निर्वाचन क्षेत्रों में कार्यकुशलता के साथ चुनाव प्रक्रिया को संपादित किया जाता है। निर्वाचन क्षेत्र प्रादेशिक क्षेत्र होता है, जहाँ से उम्मीदवार चुनाव लड़ता है। यदि केवल एक ही व्यक्ति को निर्वाचन क्षेत्र से चुना जाता है, तो उसे एक सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र कहा जाता है। यदि कई प्रतिनिधि एक ही चुनाव क्षेत्र से चुने जाते हैं, तब उसे बहु सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र कहा जाता है।

भारत में संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया एक स्वतंत्र संस्था चुनाव आयोग के द्वारा संचालित और नियंत्रित की जाती है। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का भरोसा दिलाती है। चुनाव आयोग हमारे देश में चुनाव की तिथि को निश्चित तथा घोषित करता है। चुनाव आयोग की एक दूसरी बड़ी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है. यह सुनिश्चित करना है कि सत्ताधारी दल दूसरे दलों की तुलना में अनुचित लाभ न उठा ले चुनाव प्रक्रिया कई औपचारिक दौरों से गुजरती है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत आते हैं:

1) चुनाव तिथि की घोषणा,

2) नामांकन पत्र भरना,

3) आवेदनों की जाँच,

4) नाम वापसी

5) अंतिम सूची का प्रकाशन,

समाजव

6) प्रचार,

7) वोट डालना, 8) चुनाव परिणाम की घोषणा।

वास्तव में, जैसे ही चुनाव आयोग मतदान की तिथि की घोषणा करता है, राजनीतिक दल अपनी गतिविधियाँ प्रारंभ कर देते हैं। राजनीतिक दलों का प्रथम कार्य चुनाव लड़ने वाले अपने उम्मीदवारों का चयन करना होता है। आधुनिक चुनाव एक बोझिल प्रक्रिया है। इसके संपादन के लिए राजनीतिक दलों द्वारा गठित विशाल संगठन की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त चुनावों में आने वाले खर्चों की व्यवस्था राजनीतिक दल करते है।

i) उम्मीदवारों का चयन

प्रतिनिधि लोकतंत्र के संचालन में राजनीतिक दलों की भूमिका अनिवार्य और अत्यधिक प्रमुख हो गयी है। वास्तव में, राजनीतिक दलों ने प्रजातांत्रिक राजनीति को संगठित ढाँचा प्रदान किया है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों की घोषणा, उनका समर्थन तथा उनके प्रचार का संचालन करते हैं

प्रत्येक राजनीतिक दल विशेष कार्यक्रमों की घोषणा करता है तथा सत्ता में आने के बाद इन कार्यक्रमों को पूरा करने का वचन देता है। मतदाता किसी खास पार्टी के उम्मीदवार को उसके कार्यक्रमों तथा नीतियों के आधार पर वोट देते हैं।

ii) नामांकन

चुनाव की तिथि के घोषणा के बाद राजनीतिक दल को चयन प्रक्रिया के द्वारा उम्मीदवारों का चयन करना होता है। तत्पश्चात् उम्मीदवारों को अपना नामांकन पत्र चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त चुनाव कार्यालयों में भरना पड़ता है। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि होती है। सभी नामांकन पत्रों के जमा होने के बाद उनकी जांच की प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया को नामांकन पत्रों में दिये गयी सूचनाओं की सत्यता की जाँच के लिए अपनाया जाता है। यदि कोई सदेह होता है या कोई उम्मीदवार अयोग्य पाया जाता है, उसके / उसकी नामांकन पत्र को रद्द कर दिया जाता है। जब जाँच प्रक्रिया खत्म हो जाती है, उम्मीदवारों को नाम वापसी की एक तिथि दी जाती है।

नाम वापसी की प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि (i) कम से कम मतों की बरबादी हो और (ii) मतपत्र पर सभी अंकित नाम सक्रिय उम्मीदवारों के हो।

iii) चिह्न

राजनीतिक दलों के चिह्न चुनाव आयोग द्वारा आवंटित किये जाते हैं। चुनाव आयोग प्रत्येक राजनीतिक दल को चुनाव चिह्न आवंटित करता है और सुनिश्चित करता है कि ये एक दूसरे से भिन्न हों। जिससे उनके प्रति मतदाताओं में भ्रम न पैदा हो। भारत में.. चिह्नों का निम्न कारणों से महत्त्व है

वे अशिक्षित मतदाताओं के लिए सहायक होते हैं, जो उम्मीदवारों के नाम नहीं पढ़ सकते हैं।

वे समान नामवाले दो उम्मीदवारों के बीच अंतर करने में सहायता पहुँचाते हैं। वे संबंधित राजनीतिक दल के आदर्श को प्रतिबंधित करते हैं। .

लोकतंत्र

(iv) प्रचार

प्रचार के द्वारा एक उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवार की अपेक्षा अपने पक्ष में मतदात देने के लिए लुभाता है। प्रचार मतदान के 48 घंटे पहले बंद हो जाता राजनीतिक दल और प्रत्येक उम्मीदवार अधिक से अधिक मतदाताओं के पार कोशिश करता है। चनाव प्रक्रिया में कई तरह की प्रचार तकनीकों का प्रयोग
iv) प्रचार

प्रचार के द्वारा एक उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवार की अपेक्षा अपने पक्ष में मतदाताओं को वोट देने के लिए लुभाता है। प्रचार मतदान के 48 घंटे पहले बंद हो जाता है। प्रत्येक राजनीतिक दल और प्रत्येक उम्मीदवार अधिक से अधिक मतदाताओं के पास पहुँचने की कोशिश करता है। चुनाव प्रक्रिया में कई तरह की प्रचार तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। कुछ निम्न हैं:

आयोजित सार्वजनिक सभा जिस को दल के उम्मीदवारों और कई स्थानीय और

राष्ट्रीय नेताओं द्वारा संबोधित किया जाता है। दीवारों पर पोस्टरों को चिपकाना और सड़क के किनारे बड़ी और छोटी होर्डिंग

लगाना।

अपने घोषणपत्र के मुख्य मुद्दों को पर्चों द्वारा स्पष्ट करना।

विभिन्न उम्मीदवारों के समर्थन में जुलूस निकालना।

दल के प्रभावी तथा स्थानीय लोगों द्वारा दरवाजे दरवाजे आग्रह करना विभिन्न दल के नेताओं के भाषणों का रेडियो और दूरदर्शन प्रसारण। iv) मतों की गिनती और चुनाव नतीजे की घोषणा

मतदान समाप्ति के बाद, मतपेटियों को सील करके मतगणना केन्द्रों पर जाया जाता है। मतगणना के दौरान, उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि उपस्थित होते हैं। मतगणना के बाद साधारण बहुमत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को निर्वाचित किया जाता है। कभी-कभी साधारण बहुमत समस्यायें उत्पन्न करता है। जब सिर्फ दो उम्मीदवार होते हैं, निर्वाचित उम्मीदवार बहुमत का प्रतिनिधित्व करती है। लेकिन, यदि दो या दो से अधिक उम्मीदवार होते हैं तो स्थिति वैसी नहीं होती है, उदाहरणस्वरूप यदि ए40, बी20, सी20, और डी20 मत प्राप्त करता है, तब ए को निर्वाचित घोषित किया जाता है। यद्यपि, 40 मत वास्तव में उसके विरुद्ध हैं।

चुनाव लोकतंत्र का बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि लोकतंत्र प्रणाली का समूची मोर्चाबंदी

चुनाव कैसे होता है, उस पर निर्भर करती है।

बोध प्रश्न 3

नोट: i) अपने उत्तर के लिए नीचे दिए गए रिक्त स्थान का प्रयोग करें।

ii) अपने उत्तरों को इकाई के अंत में दिए गए उत्तरों से मिलायें।

1) लोकतंत्र में चुनाव का महत्त्व क्यों होता है?

3) चुनाव आवेदन क्या होता है?

22.7 लोकतंत्र और विलगाव ( ALIENATION)

विलगाव का अर्थ अपने वास्तविक या आवश्यक स्वभाव से अलग होना है। व्यवहार में, अधिकतर प्रजातांत्रिक प्रणालियों का कार्य निजी स्वायत्तता और लोकप्रिय शासन के मापदण्डों के संदर्भ में स्तर से नीचे होता है। आधुनिक संसार में लोकतंत्र सीमित और लोकतंत्र के अप्रत्यक्ष रूप के दौर से गुजर रहा है और इस प्रकार से स्वतंत्र नागरिक को विलगाव की ओर ले जाता है। यह लोकतंत्र उससे कुछ ज्यादा नहीं है, जिसको जोसेफ • शममपीटर (Joseph Schumpeter) ने “संस्थानिक व्यवस्था की संज्ञा दी है और जो उन, राजनीतिक निर्णयों तक पहुँचने के लिए होता है, जिसके तहत व्यक्ति मतों के प्रतियोगी संघर्ष के माध्यम से निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त करते हैं। इस संस्थानिक व्यवस्था के अर्थविहीन कर्मकांड में लोकप्रिय सहभागिता को कम करने के लिए उग्र लोकतंत्रवादियों ने आलोचना की है। जैसे राजनीतिज्ञों को हटाकर मात्र दूसरे राजनीतिज्ञों को लाने के लिए प्रत्येक कुछ वर्षों में मतदान करना। संक्षेप में, लोग कभी भी शासन नहीं करते हैं और सरकार और लोगों के बीच बढ़ती दूरी अचलता, उदासीनता और विलगाव के फैलने के रूप में झलकती है।

22.8 लोकतंत्र और जनमत

बहुत हद तक लोकतंत्र जनमत पर निर्भर करता है। प्रतिनिधि लोकतंत्र में प्रत्येक सरकार को अपनी नीतियों के प्रति जनता की क्या प्रतिक्रिया होगी, यह सोचना पड़ता है। सभी दल शक्ति को हथियाना तथा बरकरार रखना चाहते हैं। अगले चुनाव में सत्ता में आना इस बात पर निर्भर करता है कि जनता उनके कार्य के बारे में क्या सोचती है, जब दल सत्ता में था।

• सशक्त जनमत सत्ता में आने तथा एक दल या दलों के गठजोड़, जिसे मोर्चा कहा जाता है, सरकार के गठन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि जनता सजग तथा समझदार है तथा अपने आप जानकारी प्राप्त करती है, तब सरकार जनता की आकाक्षाओं की अवहेलना का साध्य नहीं कर सकती है। यदि सरकार उनकी आकांक्षाओं का अनादर

लोकतंत्र

करती है, वह तत्क्षण अलोकप्रिय हो जाती है। दूसरी तरफ,
करती है, वह तत्क्षण अलोकप्रिय हो जाती है। दूसरी तरफ, यदि जनता सजग और समझदार नहीं है, तो सरकार गैरजिम्मेदार बन सकती है। उस वक्त यह लोकतंत्र के आधार स्तंभ के लिए खतरा बन सकती है।

जनमत का निर्माण

जनमत विभिन्न प्रकार और कई संस्थाओं के योगदान से बनाया जाता है। स्वस्थ जनमत के लिए, नागरिकों को उनके चारों ओर उनके अपने देश में और संसार में क्या हो रहा है, जानना चाहिए। एक देश की सरकार सिर्फ आन्तरिक समस्याओं के लिए ही नीतियाँ नहीं निर्धारित करती है, बल्कि विदेश नीति भी तय करती है। नागरिक को अपना निर्णय लेने से पहले विभिन्न मतों का ख्याल रखना चाहिए। यद्यपि लोकतंत्र के अच्छे संचालन के लिए, नागरिकों को विभिन्न दृष्टिकोणों से भली भाँति अवगत होने की आवश्यकता है। उन अभिकरणों में प्रेस, इलेक्ट्रोनिक माध्यम और चलचित्र आते हैं जो स्वस्थ जनमत निर्माण में मदद करते हैं।

लोकतंत्र निर्णय प्रक्रिया में व्यक्ति को अपनी राय जाहिर करने का मौका देता है। इन सब के लिये मुक्त वादविवाद तथा बहस की आवश्यकता होती है। प्रजातांत्रिक सरकार साधारण नागरिक को बहुत स्वतंत्रता प्रदान करती है। फिर भी, नागरिकों को स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी, बंधन और अनुशासन के साथ करना चाहिए। यदि लोगों को शिकायत है तो उन्हें प्रजातांत्रिक प्रणाली के अभिकरणों के माध्यम से अवश्य दर्शाना चाहिए। नागरिकों के अनुशासनहीनतापूर्ण कार्यों से प्रजातांत्रिक व्यवस्था में रुकावटें पैदा हो सकती हैं।

बोध प्रश्न 4

नोट: i) अपने उत्तर के लिए नीचे दिए गए रिक्त स्थान का प्रयोग करें। ii) अपने उत्तरों को इकाई के अंत में दिए गए उत्तरों से मिलायें। 1) क्या किसी को लोकतंत्र में नागरिकता से वंचित रखा जा सकता है ?

2)

राजनीतिक दल कैसे जनमत को व्यक्त करते हैं?

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