0 मृदा प्रदूषण (SOIL POLLUTION) – Soft Study Akash Kumar

मृदा प्रदूषण (SOIL POLLUTION)

मृदा प्रदूषण (SOIL POLLUTION)

मृदा की गुणवत्ता और इसकी उर्वरक शक्ति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले किसी भी पदार्थ का भूमि में मिलना “मृदा प्रदूषण” कहलाता है। प्राय: जल भी भूमि को प्रदूषित करने वाला एक प्रदूषक है। प्लास्टिक, कपड़ा. ग्लास (काँच), धातु और जैव पदार्थ, सीवेज, सीवेज गाद, निर्माण का मलबा, ऐसा कोई भी ठोस कूड़ा जो घरों, व्यवसायों और औद्योगिक संस्थानों से निकलता है मृदा प्रदूषण में वृद्धि करता है। राख, लोहा और लोहे का कचरा, चिकित्सकीय और औद्योगिक कूड़ा जिन्हें कहीं भी जमीन पर डाल दिया जाता है, मृदा प्रदूषण के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इसके साथ

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पर्यावरणीय प्रदूषण

ही उर्वरक और कीटनाशक जो खेती में प्रयोग किये जाते हैं, मिट्टी में मिल जाते हैं और नगर के कूड़े कर्कट से गड्ढों को भरना मृदा प्रदूषण के कारण हैं। अम्लीय वर्षा और प्रदूषकों का शुष्क संग्रह जो धरती के तल पर किया गया हो, मृदा प्रदूषण को बढ़ावा देता है।

10.8.1 मृदा प्रदूषण के स्रोत

प्लास्टिक थैलियां कम घनत्व वाली पोलीथीन (Low density polythylene, LDPE) से प्लास्टिक थैलियां बनती हैं जो वास्तव में कभी भी नष्ट नहीं होती हैं, इसके कारण एक विकराल पर्यावरणीय सकट उत्पन्न हो गया है। फैंकी हुई थैलिया नालियों को और सीवेज व्यवस्था को बंद कर देती हैं। उन थैलियों में बचा खुचा खाना या सब्जी आदि के छिलके फेंकने से गायें और कुत्ते उन्हें वैसे ही खा लेते हैं और प्लास्टिक के कारण दम घुटने से उनकी मौत हो सकती है। प्लास्टिक एक अजैव निम्नकरणीय पदार्थ है और प्लास्टिक के कूड़े के ढेर के साथ जलने पर अत्यधिक विषालु और जहरीली गैसे जैसे कार्बन मोनोक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, फॉस्जीन, डायोक्सिन और अन्य जहरीले क्लोरीनीकृत यौगिक निकलते हैं।

मॉड्यूल – 4 समसामयिक पर्यावरणीय मुद्दे

टिप्पणी

चित्र 10.3: प्लास्टिक थैलियों का ढेर के साथ अन्य बचे खुचे सामान को गायें खा रही है.

औद्योगिक स्रोत- इसमें धूल, राख, रासायनिक अवशिष्ट धातु और नाभिकीय कचरा सम्मिलित है। बड़ी संख्या में औद्योगिक रसायन, रंजक, एसिड इत्यादि किसी न किसी प्रकार से मिट्टी में मिल जाते हैं और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं यहाँ तक कि कैंसर का भी कारण बन जाते हैं।

कृषि सम्बन्धी स्रोत कृषि रसायन विशेषकर रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक भूमि को प्रदूषित करते हैं। इन खेतों से बहने वाले पानी के साथ बहकर आने वाले उर्वरक जल निकायों में मिल जाते हैं, जिस कारण जलसंकायों में सुपोषण की समस्या हो जाती है। कीटनाशक दवाइयाँ बहुत विषाक्त होती हैं जो मनुष्यों और पशुओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है जिसके कारण श्वास सम्बंधी समस्याएं, कैंसर और मृत्यु भी सम्भव है।

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मॉड्यूल-4 समसामयिक पर्यावरणीय मुद्दे

10.8.2 मृदा प्रदूषण का नियन्त्रण

पर्यावरण विज्ञान उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रम

बिना विचारे अविनाशी ठोस कड़े को कहीं भी फेंकने से बचना चाहिये।
समसामयिक पर्यावरणीय मुद्दे

10.8.2 मृदा प्रदूषण का नियन्त्रण

बिना विचारे अविनाशी ठोस कूड़े को कहीं भी फेंकने से बचना चाहिये।

टिप्पणी

मृदा प्रदूषण को रोकने के लिये प्लास्टिक थैलियों का उपयोग रोकना होगा। इसके स्थान पर कपड़े का या निम्न स्तर को सामग्री जैसे कागज आदि का प्रयोग करना चाहिये। सीवेज का प्रयोग उर्वरको या भराव के लिये करने से पूर्व अच्छी तरह उपचारित कर लेना चाहिए। घरों से खेती से निकलने वाले जैविक पदार्थ और अन्य चीजों को अलग-अलग छांट लेना आवश्यक है जिससे वर्मिकम्पोस्टिंग (Vermicomposting) हो सके। यह एक लाभकारी उर्वरक को उप-उत्पाद की तरह उत्पन्न करता है। औद्योगिक कचरे को फेंकने से पहले हानिकारक पदार्थों को हटाने के लिये उचित रूप से उपचारित कर लेना चाहिए। जैव चिकित्सा सम्बन्धी कूड़े को पृथक ही एकत्रित करना चाहिये और उचित रूप से जलाने वाले उपकरणों (Incinerators) में भस्म कर देना चाहिए।

पाठगत प्रश्न 10.4

1. मृदा प्रदूषण को परिभाषित कीजिए।

2. प्लास्टिक बैग पर्यावरण के लिये सर्वाधिक परेशानी पैदा करने वाली वस्तु क्यों है।

3. वर्मिकम्पोस्टिंग जैविक कूड़े को एक उपयोगी पदार्थ में बदल देती है। यह पदार्थ किस उपयोग में आता है?

10.9 विकिरण (रेडियेशन) प्रदूषणः स्रोत और खतरे

विकिरण प्रदूषण प्राकृतिक पृष्ठभूमि में पाये जाने वाले विकिरणों में वृद्धि के कारण होता है। विकिरण प्रदूषण के बहुत से स्त्रोत हैं जैसे नाभिकीय तापीय संयंत्रों द्वारा निकले नाभिकीय अपशिष्ट, खनन और नाभिकीय पदार्थों की प्रक्रियाओं द्वारा नाभिकीय प्रदूषण का सबसे भयानक उदाहरण 1986 में रूस में होने वाली चेरिनोबिल आपदा थी, लेकिन उसका प्रभाव आज तक कायम है।

10.9.1 विकिरण (Radiation)

रेडिएशन ऊर्जा का एक रूप है जो अंतरिक्ष से यात्रा करता है। विघटित होते रेडियोएक्टिव

न्यूक्लाइडस से उत्पन्न होने वाला विकिरण प्रदूषण का मुख्य स्रोत है। विकिरण को दो समूहों में

बांट सकते हैं नान आयोनाइजिंग और आयोनाइजिंग रेडिएशन (आयनों में परिवर्तित होने वाला और

आयनों में परिवर्तित नहीं होने वाला)

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पर्यावरणीय प्रदूषण

नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन (आयनों में परिवर्तित नहीं होने वाला विकिरण) स्पैक्ट्रम की लम्बी तरंगदैथ्यौँ पर विद्युत चुम्बकीय तरंगों से निर्मित होता है जिनकी परास समीप को पराबैंगनी किरणों (अल्ट्रावॉयलेट किरणों) से रेडियो तरंगों तक होती है। इन तरंगों में इतनी ऊर्जा होती है कि जिस माध्यम से ये गुजरती हैं, उसके परमाणुओं (एटम) और अणुओं को उत्तेजित कर देती हैं जिससे उनके कम्पन की गति बढ़ जाती है पर इतनी दृढ़ नहीं कि उन्हें ऑयनों में बदल सके। माइक्रोवेव ॲवन में रेडिएशन से खाद्य पदार्थ में होने वाले जल के परमाणुओं में कम्पन को गति तीव्र हो जाती है जिससे पदार्थ का तापमान बढ़ जाता है।

आयोनाइजिंग (ऑयनों में परिवर्तित होने वाले) रेडिएशन जिस माध्यम से गुजरता है उसके परमाणु और अणुओं को आयनों में परिवर्तित कर देता है। विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन जैसे लघु तरंगदैर्घ्य, पराबैंगनी विकिरण, एक्स किरणें और गामा किरणें, ऊर्जा से भरे कण जो नाभिकीय प्रक्रिया में उत्पन्न होते हैं, विद्युत शक्ति से सम्पन्न कण जैसे अल्फा व बीटा कण जो रेडियोधर्मी सड़न में पैदा होते हैं और न्यूट्रॉन जो नाभिकीय विखण्डन में उत्पन्न होते हैं।

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पर्यावरणीय मुद्दे

टिप्पणी

उपर्युक्त सभी जीवों के लिये हानिप्रद हैं। नाभिकीय प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाले विद्युतीय कण माध्यम के परमाणु या अणु से इलैक्ट्रॉनों को तोड़ने की पर्याप्त शक्ति रखते हैं जिससे ऑयन निर्मित हो जाते हैं। उदाहरण के लिये जल अणुओं में उत्पन्न आयनों से ऐसी प्रतिक्रिया हो सकती है जो प्रोटीन और दूसरे महत्त्वपूर्ण अणुओं के बन्धों को तोड़ सकती है। इसका एक उदाहरण होगा कि अगर एक गामा किरण एक कोशिका से गुजरती है डीएनए के पास के जलीय अणु आयनों में बदल सकते हैं और आयनों की डीएनए के साथ प्रतिक्रिया उन्हें तोड़ सकती है रासायनिक बंधो को तोड़कर इनसे रासायनिक परिवर्तन भी हो सकता है जिसके कारण जीवधारी ऊतकों को हानि पहुँचती है। आयोनाइजिंग रेडिएशन से जैविक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है अतः ये प्रदूषक की श्रेणी में आते हैं।

10.9.2 रेडिएशन हानि (विकिरण से होने वाली हानि)

10.9.2 रेडिएशन हानि ( विकिरण से होने वाली हानि)

आयोनाइजिंग विकिरण से होने वाली जैविक हानि को विकिरण हानि (रेडिएशन डैमेज) का नाम दिया गया है। बड़ी मात्रा का विकिरण कोशिका को नष्ट कर देता है जिससे उसके सम्पर्क में आने वाले जीव प्रभावित होते हैं और शायद आने वाली पीढ़ी भी प्रभावित कोशिका में उत्परिवर्तन हो सकता है जिसके फलस्वरूप कैंसर भी हो सकता है। विकिरण की एक बड़ी मात्रा जीव को मार भी सकती है।

विकिरण से होने वाली हानिक को दो प्रकारों में विभाजित कर सकते हैं (अ) शारीरिक हानि (इसे विकिरण रोग भी कहते हैं) (ब) आनुवांशिक हानि (जैनेटिक) शारीरिक (सोमेटिक) हानि उन कोशिकाओं की हानि है जिनका प्रजनन से सम्बन्ध नहीं होता। शारीरिक हानि में त्वचा का लाल होना, बालों का झड़ना, अल्सर होना, फेफड़ों में फाइब्रोसिस, छिद्रों का बनना, श्वेत रक्त कोशिकाओं में कमी होना और आंखों में मोतियाबिंद आना। यह हानि कैंसर और मृत्यु के रूप में भी हो सकती है। अनुवाशिक (जेनेटिक) हानि में उन कोशिकाओं पर प्रभाव पड़ता है जिनका सम्बन्ध प्रजनन से है। इस हानि से प्रजनन सम्बन्धी विकार उत्पन्न होता है। जीन में परिवर्तन होने से असामान्यता उत्पन्न होती है। यह जीव विकार अगली पीढ़ी में भी स्थानांतरित हो जाता है।

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10.9.3 रेडिएशन मात्रा (विकिरण की मात्रा)

विकिरण द्वारा होने वाली जैविक हानि इस बात से तय होती है कि विकिरण की तीव्रता कितनी थी और विकिरण के सामने अनावृत रहने की कालावधि कितनी थी। जैविक व्यवस्था में रेडिएशन द्वारा जमा की गई ऊर्जा की मात्रा पर यह निर्भर करती है। मनुष्यों पर रेडिएशन के अनावरण के टिप्पणी प्रभावों के अध्ययन में यह समझना आवश्यक है कि किसी कण द्वारा किया गया जैविक नुकसान केवल जमा की गई कुल ऊर्जा पर निर्भर नहीं करता बल्कि कणों द्वारा जितनी दूरी तय की गई है, उसमें होने वाली प्रति यूनिट ऊर्जा हानि की दर पर भी निर्भर होता है (या रेखिक ऊर्जा स्थानांतरण) उदाहरण के लिए अल्फा कण प्रति यूनिट जमा ऊर्जा की दर से अधिक हानि पहुंचाते हैं न कि दूसरे इलैक्ट्रॉन

विकिरण के प्रभाव और मात्रा

मानव के समतुल्य मात्रा की परम्परागत यूनिट रैम (rem) है जो मनुष्य में विकिरण समतुल्य के

लिये मान्य है।

कम मात्रा पर जो हम प्रतिदिन बैकग्राउन्ड रेडिएशन (< 1 mrem) से प्राप्त करते हैं, कोशिकाएँ हानि की तीव्रता से ठीक कर देती हैं। अधिक मात्रा पर (100 rem तक) कोशिकाएं हानि को ठीक करने की क्षमता नहीं होती और ये कोशिकाएं या तो स्थाई रूप से परिवर्तित हो जाती हैं या मर जाती हैं। ये परिवर्तित कोशिकाएं असामान्य कोशिकाओं को जन्म देती चली जाती हैं, जब वे भागों में बंटती हैं और कैंसर का कारण भी बन जाती हैं।

अधिक उच्च मात्रा पर भी कोशिकाएं तीव्र गति से प्रतिस्थापित नहीं होती हैं और ऊतक कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं। इसका एक उदाहरण ‘विकिरण रोग’ (Radiation sickness) है। यह दशा पूरे शरीर को उच्च मात्रा देने के परिणामस्वरूप होती है। (>100 rem)

नाभिक ऊर्जा उत्पन्न करने वाले यंत्रों (रिएक्टर) में होने वाले नाभिकीय विस्फोट और दुर्घटनाएं नाभिकीय खतरों के सबसे गम्भीर बड़े स्रोत हैं। नागासाकी और हिरोशिमा में होने वाले परमाणु विस्फोट (Atomic explosion) के प्रभाव को आज तक भुलाया नहीं जा सका। नाभिकीय रिएक्टर की दुर्घटना, जो 1986 में चेरिनोबिल (Chernobyl) में हुई थी, में अनेक वैज्ञानिक मारे गये थे और रेडियो न्यूक्लाइड की भारी मात्रा वातावरण में फैलने के फलस्वरूप आस पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने भी लम्बे समय तक विकिरण हानि को झेला था।

नाभिकीय पॉवर प्लांट में दुर्घटनाएं

नाभिकीय यंत्र में नाभिकीय विखंडन से बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है जो यदि नियंत्रित नहीं की गई तो यन्त्र की ईंधन छड़ें भी पिघल जाती हैं। यदि यह पिघलना किसी दुर्घटना के कारण होता है तो इससे बहुत खतरनाक रेडियोधर्मी पदार्थ बड़ी मात्रा में निकलते हैं जो वातावरण में घुलकर मनुष्य, पशुओं और पेड़-पौधों के लिये विनाशकारी परिणाम उत्पन्न कर देता है। इस प्रकार की दुर्घटना और रिएक्टर को फटने से बचाने के लिये रिएक्टर का डिजाइन पूर्ण सुरक्षित और अनेक सुरक्षा विशिष्टताओं के साथ होना चाहिये।

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