0 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना – Soft Study Akash Kumar

भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
The demographic structure of the Indian society

 

जनसांख्यिकी : जनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन जनांकिकी कहलाता है।
Demography is the systematic study of population.

इसका अंग्रेजी पर्याय डेमोग्राफी यूनानी भाषा के दो शब्दों डेमोस – लोग तथा ग्राफीन यानि वर्णन अर्थात् लोगों का वर्णन

 

लोगों का वर्णन
Description of people

जनसंख्या आकार में परिवर्तन – जन्म birth
changes in population size – मृत्यु death
प्रवास migration

जनसंख्या संरचना (structure & composition of the population)
स्त्री-पुरुष
sex ratio
लिंग अनुपात

इससे जन्म, मृत्यु, प्रवसन, लिंग अनुपात आदि का अध्ययन किया जाता है।

जनसांख्यिकी के प्रकार
Types of Demography

आकारिक जनसांख्यिकी (formal demography) : इसमें जनसंख्या के आकार / मात्रा का अध्ययन किया जाता है।

सामाजिक जनसांख्यिकी (social demography) : इसमें जनसंख्या के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक पक्षों पर विचार किया जाता हैं।

समाजशास्त्र के लिए जनसांख्यिकी का महत्व
Importance of Demography to Sociology

समाजशास्त्र का उद्भभव Emergence of Sociology

समाजशास्त्र के अलग विषय के रूप में पहचान
Successful establishment as an academic discipline

18वी शताब्दी के पश्चात यूरोप में उतपन्न हुई दो घटनाएँ: परिणामस्वरुप राज्य का विस्तार

1. राजनितिक संगठन के रूप में राष्ट्र राज्यों की स्थापना
The formation of nation state as the Principal form of Political Organization

2. आकड़ों से सम्बंधित: आधुनिक विज्ञान सांख्यिकी की स्थापना
Beginnings of the modern science of statistics

राज्य का विस्तार – Development of state

1. जनस्वास्थ्य प्रबंध का विकास

2. पुलिस और कानून व्यवस्था का अनुपालन

3. कृषि एवं उद्योग संबंधी आर्थिक

4. कराधान

5. राजस्व उत्पादन में जाग्रति

1790 में अमेरिका में पहली आधुनिक किस्म की जनगणना की
The American census of 1790 was probably the first modern census

18 शताब्दी में इसी पद्धिति को यूरोप द्वारा अपनाया गया।

भारत में जनगणना अंग्रेज़ो द्वारा 1867-72 की बीच प्रारम्भ की गयी।
In India censuses began to be conducted by the British Indian government

1881 से भारत में हर दस साल बाद जनगणना की जाती है।
In India, regular ten yearly censuses have been conducted since 1881

1951 से 2020 तक कुल सात दसवर्षीय जनगणना की जा चुकी है।
जनसांख्यिकी आंकड़ो से फायदा

जनसांख्यिकी संबधी कुछ सिद्धांत एवं संकल्पनाएँ

माल्थस का जनसंख्या वृद्धि सिद्धांत

Essay on Population – 1788 _____________निराशावादी सिद्धांत

थामस रोवर्ट माल्थस का जनसंख्या वृद्धि का सिद्धान्त (1766-1834)

जनसंख्या ज्योमिटीक अनुपात से बढ़ती है। जैसे 2, 4, 8, 16, 32 से

खाद्य उत्पादक में वृद्धि गणितीय (समरंतर) रूप से होती है। जैसे- 2, 4, 6, 8, 10 आदि।

इससे जनसंख्या व खाद्य सामग्री में असंतुलन पैदा होता है।

समृद्धि बढ़ाने के लिए जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित किया जाए।

माल्थस ने जनसंख्या नियंत्रण के दो प्रकारों के प्रतिबंध का उल्लेख किया
Suggestion on Population Control

1. प्राकृतिक अवरोध (positive check) – जैसे अकाल, भूकम्प, बाढ़, बीमारी आदिl

2. कृतिम अवरोध (preventive check) – जैसे बड़ी उम्र में विवाह, यौन संयम, ब्रह्मचार्य का पालन आदि।

थॉमस माल्थस के सिद्धांत की आलोचना
Criticism of Thomas Malthus’s theory

मार्क्सवादी और उदारवादियों का कहना था कि आर्थिक वृद्धि जनसँख्या वृद्धि से अधिक हो सकती है जैसा की यूरोप में हुआ है।
Liberal and Marxist scholars for asserting that poverty was caused by population growth

गरीबी और भुखमरी जनसँख्या वृद्धि की बजाए आर्थिक असमान वितरण के कारण फैलती है।
The critics argued that problems like poverty and starvation were caused by the unequal distribution of economics resources rather than by population growth

मार्क्सवादी और उदारवादियों का कहना था कि एक अन्याय पूर्ण सामाजिक व्यवस्था के कारण कुछ चंद अमीर लोग जो की विलासता जीवन का आनंद लेते है।
An unjust social system allowed a wealthy and privileged minority to live in

जबकि बहुसंख्यक लोगो को गरीबी के हालातों में जीना पड़ता है।

While the vast majority of the people were forced to live in poverty

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