0 पर्यावरणीय प्रदूषण – Soft Study Akash Kumar

पर्यावरणीय प्रदूषण

पर्यावरणीय प्रदूषण

मानव की विकास संबंधी गतिविधियाँ जैसे भवन निर्माण, यातायात और निर्माण न केवल प्राकृतिक संसाधनों को घटाती है बल्कि इतना कूड़ा-कर्कट (अपशिष्ट) भी उत्पन्न करती हैं जिससे वायु, जल, मृदा और समुद्र सभी प्रदूषित हो जाते हैं। वैश्विक ऊष्मण बढ़ता है और अम्ल वर्षा बढ़ जाती है। अनुपचारित या अनुचित रूप से उपचारित अपशिष्ट (कूड़ा-कर्कट) नदियों के प्रदूषण और पर्यावरणीय अवक्रमण का मुख्य कारण है जिसके फलस्वरूप स्वास्थ्य का खराब होना और फसलों की उत्पादकता में कमी आती है। इस पाठ में आप प्रदूषण के प्रमुख कारणों, हमारे पर्यावरण पर पड़ने वाले उनके प्रभावों और विभिन्न उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, जिनसे इस प्रकार के प्रदूषणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

उद्देश्य

इस पाठ के अध्ययन के समापन के पश्चात आप प्रदूषण और प्रदूषक शब्दों को परिभाषित कर सकेंगे

विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों की सूची बना सकेंगे;

प्रदूषण के प्रकार, स्रोत, मानव स्वास्थ्य पर उनके दुष्प्रभाव और वायु प्रदूषण, अन्तः वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने का वर्णन कर सकेंगे;

जल प्रदूषण, उसके कारण और नियंत्रण का वर्णन कर पायेंगे; तापीय (उष्मीय) प्रदूषण का वर्णन कर पायेंगे;

मृदा प्रदूषण, उसके कारण और नियंत्रण का वर्णन कर सकेंगे,

विकिरण (रेडिएशन) प्रदूषण, उसके स्रोत और खतरों (संकेतों) का वर्णन कर पायेंगे।

10.1 प्रदूषण और प्रदूषक पदार्थ

मानव गतिविधियाँ किसी न किसी प्रकार से पर्यावरण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती ही हैं। एक पत्थर काटने वाला उपकरण वायुमंडल में निलंबित कणिकीय द्रव्य (Particulate matter, उड़ते

मॉड्यूल-4 समसामयिक पर्यावरणीय मुद्दे

टिप्पणी

पर्यावरण विज्ञान उच्चतर माध्यमिक पाद

हुए कण) और शोर फैला देता है। गाड़ियां (ऑटोमोबाइल) अपने पीछे लगे निकास पाइप से ना सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्र काला धुआं छोड़ते हैं जिससे वातावरण प्रदूषित होता है। घरेलू अपशिष्ट (कूड़ा-कर्कट) औ से बहाये जाने वाले कीटनाशक और रासायनिक उर्वरकों से युक्त दूषित पानी जल निका प्रदूषित करता है। चमड़े के कारखानों से निकलने वाले बर्हिःस्त्राव गंदे कूड़े और पानी में रासायनिक पदार्थ मिले होते हैं और उनसे तीव्र दुर्गंध निष्कासित होती है। ये केवल कुछ उदा जिनसे पता चलता है कि मानव गतिविधियाँ वातावरण को कितना प्रदूषित करती हैं। (Pollution) को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है “मानव गतिविधियों के फल पर्यावरण में अवांछित पदार्थों का एकत्रित हुए कण) और शोर फैला देता है। गाड़ियां (ऑटोमोबाइल) अपने पीछे लगे निकास पाइप से नाइट्रोजन, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण भरा काला धुआं छोड़ते हैं जिससे वातावरण प्रदूषित होता है। घरेलू अपशिष्ट (कूड़ा-कर्कट) और खेतों से बहाये जाने वाले कीटनाशक और रासायनिक उर्वरकों से युक्त दूषित पानी जल निकायों को टेप्पणी प्रदूषित करता है। चमड़े के कारखानों से निकलने वाले बर्हिः स्त्राव गंदे कूड़े और पानी में बहुत से रासायनिक पदार्थ मिले होते हैं और उनसे तीव्र दुर्गंध निष्कासित होती है। ये केवल कुछ उदाहरण हैं जिनसे पता चलता है कि मानव गतिविधियाँ वातावरण को कितना प्रदूषित करती हैं। प्रदूषण (Pollution) को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है “मानव गतिविधियों के फलस्वरूप पर्यावरण में अवांछित पदार्थों का एकत्रित होना, प्रदूषण कहलाता है।” “जो पदार्थ पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं उन्हें प्रदूषक (Pollutant) कहते हैं।” प्रदूषक वे भौतिक, रासायनिक या जैविक पदार्थ होते हैं जो अनजाने ही पर्यावरण में निष्कासित हो जाते हैं और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानव समाज और अन्य जीवधारियों के लिये हानिकारक होते हैं।

10.2 प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण के निम्नलिखित प्रकार हो सकते हैं:

वायु प्रदूषण

● ध्वनि प्रदूषण

जल प्रदूषण

• मृदा (भूमि) प्रदूषण

• तापीय प्रदूषण (थर्मल प्रदूषण)

• विकिरण प्रदूषण (रेडिएशन प्रदूषण)

10.3 वायु प्रदूषण (AIR POLLUTION)

वायु प्रदूषण औद्योगिक गतिविधियों और कुछ घरेलू गतिविधियों के फलस्वरूप होता है। ताप संयंत्रों, जीवाश्ममय ईंधन के निरन्तर बढ़ते प्रयोग, उद्योगों, यातायात, खनन कार्य भवन निर्माण और पत्थरों की खुदाई से वायु प्रदूषण होता है। वायु प्रदूषण को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि वायु में किसी भी हानिकारक ठोस, तरल या गैस का, जिसमें ध्वनि और रेडियोधर्मी विकिरण भी शामिल हैं, इतनी मात्रा में मिल जाना जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानव और अन्य जीवधारियों को हानिकारक रूप से प्रभावित करते हैं। इनके कारण पौधे, सम्पत्ति और पर्यावरण की स्वाभाविक प्रक्रिया बाधित होती है। वायु प्रदूषण दो प्रकार का होता है (1) निलंबित कणिकीय द्रव्य (निकले हुए ठोस कण) (2) गैस रूपी प्रदूषक जैसे कार्बन डाईऑक्साइड (CO.), NOx आदि। कुछ वायु प्रदूषक, उनके स्रोत और उनके प्रभाव तालिका
तालिका 10.1: कणिकीय वायु प्रदूषक, उनके स्रोत और उनका प्रभाव

प्रदूषक

निलंबित कणिकीय द्रव्य/

धूल

स्रोत

घरेलू, औद्योगिक और

वाहनों से निकलने वाला धुआं (सूट) ।

विशिष्ट संघटना पर निर्भर करता है। सूर्य का प्रकाश कम होता है, दृश्यता में कमी और क्षति-क्षरण में वृद्धि होती है। फेफड़ों में धूल (न्यूमोकोनियोसिस) आदि जमना, अस्थमा, कैंसर और फेफड़ों के अन्य रोग हो जाते हैं घरों और वनस्पतियों पर ठहर जाती है। हवा में ठोस निलंबित कण (SPM) शामिल हो जाते हैं। निक्षालकों

में हानिकारक पदार्थ निहित होते हैं।

हवा में उड़ती हुई राख

टिप्पणी

फैक्ट्रियों की चिमनी और पावर प्लांटों से निकलते हुए धुएं का भाग।

10.3.1 कण रूपी प्रदूषक (Particulate pollutants)

प्रभाव

औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाली धूल और कालिख वह कणरूपी द्रव्य हैं जो वायु में निलंबित हो जाते हैं। इनका आकार (व्यास) 0.001 से 500 um तक होता है। 10 um से कम आकार के कण हवा की तरंगों के साथ बहते रहते हैं। जो कण 10 pm से बड़े होते हैं वे नीचे बैठ जाते हैं। जो 0.02 um से छोटे होते हैं उनसे वायुविलय (एरोसोल्स) अपना अस्तित्व बनाये रखते हैं। हवा में तैरने वाले कणों (एसपीएम) का मुख्य स्रोत गाड़ियाँ, पॉवर प्लांटस (ताप संयंत्र), निर्माण गतिविधियाँ, तेल रिफाइनरी, रेलवे यार्ड, बाजार और फैक्टरी आदि होते हैं।

• हवा में उड़ती हुई राख (फ्लाई एश)

थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले के जलने की प्रक्रिया में राख उप-उत्पाद की तरह निष्कासित होती है। यह राख वायु और जल को प्रदूषित करती है। जल स्रोतों में भारी धातु प्रदूषण का कारण भी हो सकती हैं। यह राख वनस्पतियों पर भी प्रभाव छोड़ती है क्योंकि यह पत्तियों पर और मिट्टी पर पूरी तरह से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जम जाती है। यह राख ईंट बनाने और भरावन के लिये भी प्रयोग में लाई जाती है।

• सीसा (लैंड) और अन्य धातुओं के कण

टैट्राइथाइल लैड (TEL) को गाड़ियों की सरल और सहज गति के लिये पेट्रोल में परा आघात के रूप में प्रयोग किया जाता है। गाड़ियों की निकास नलियों (Exhaust pipe) से निकल कर हवा में मिल जाता है। यदि श्वास के साथ शरीर में पहुँच जाता है तो गुर्दे (वृक्क) और जिगर (यकृत) को प्रभावित करता है और लाल रक्त कणों के बनने में बाधा पहुंचाता है। यदि सीसा पानी और भोजन के साथ मिल जाता है तो एक तरह से विष बन जाता है। यह बच्चों पर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है जैसे बुद्धि को कमजोर करता है।
यमुद्दे लौह, एल्युमिनियम, मैग्नीशियम, जिंक, और अन्य धातुओं के ऑक्साइड भी बहुत विपरीत प्रभाव डालते है। खनन प्रक्रिया और धातुकर्मीय प्रक्रिया में यह पौधों के ऊपर धूल की तरह जम जाता है। इससे कार्यिकीय, जैव-रासायनिक और विकास सम्बन्धी विकृतियाँ पौधों में विकसित हो जाती हैं जो पौधों में जननिक विफलता की ओर योगदान करती है।

टिप्पणी

तालिका 10.2: आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र में 24 घंटे में होने वाले प्रदूषकों के संकेंद्रण (mg/m) का वार्षिक औसत (वर्ष 2000)

स्वीकार्य एस. पी.एम.

आवासीय

140-200 मिग्रा /मी, औद्योगिक 360-500 मिग्रा /मी

शहर

आवासीय क्षेत्र

औद्योगिक क्षेत्र

आगरा

349

388 160

185

भोपाल

दिल्ली

368

372

348

444

कानपुर

कोलकाता

218

405

नागपुर

140

157

10.3.2 गैसीय प्रदूषक (Gaseous pollutants)

पॉवर प्लांटों, उद्योगों, विभिन्न प्रकार की गाड़ियों निजी और व्यवसायिक दोनों ही ईंधन के रूप में पेट्रोल या डीजल का प्रयोग करते हैं और गैसीय प्रदूषक जैसे कार्बन डाइआक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड को कण रूपी द्रव्य के साथ धुएं के रूप में हवा में छोड़ते हैं। ये सभी मनुष्यों और वनस्पति पर हानिकारक प्रभाव छोड़ते हैं तालिका 10.3 की सूची में ऐसे ही कुछ प्रदूषक दिये गये हैं। इनके स्रोत और कुप्रभाव को भी तालिका में दिखाया गया है।

तालिका 10.3: गैसीय वायु प्रदूषक, उनके स्रोत और प्रभाव

प्रदूषक

स्रोत

हानिकारक प्रभाव

मोटर वाहन, लकड़ी और कोयले के जलने से

• श्वसन सम्बंधी समस्याएँ • हरित गृह प्रभाव

कार्बन यौगिक (CO और CO,)

सल्फर यौगिक (SO, और HS)

शक्ति संयंत्रों व रिफाइनरी ज्वालामुखी विस्फोट

• मानवों में श्वसन समस्याएँ

• पौधों में क्लोरोफिल की कमी (क्लोरोसिस) • अम्ल वर्षा

नाइट्रोजन यौगिक (NO और NO)

मोटरवाहन द्वारा छोड़ा गया धुआँ, वायुमण्डलीय अभिक्रिया

• मानवों में आँखों व फेफड़ों में जलन

• पादपों की उत्पादकता में कमी होना

• अम्ल वर्षा से पदार्थों (धातुओं व पत्थर)

हाइड्रोकार्बन (बैंजीन, इथाइलीन)

निलंबित कण द्रव्य (SPM) हवा में निलंकित कोई ठोस द्रव्य कण (राख, धूल, सीसा)

रेशे (कपास, ऊन)

मोटर वाहन, लकड़ी और कोयले के जलने से शक्ति संयंत्रों व रिफाइनरी ज्वालामुखी विस्फोट

मोटरवाहन द्वारा छोड़ा गया धुआँ, वायुमण्डलीय अभिक्रिया

हानिकारक प्रभाव

• श्वसन सम्बंधी समस्याएँ • हरित गृह प्रभाव

• मानवों में श्वसन समस्याएँ

• पौधों में क्लोरोफिल की कमी (क्लोरों • अम्ल वर्षा • मानवों में आँखों व फेफड़ों में ज • पादपों की उत्पादकता में कमी हो

• अम्ल वर्षा से पदार्थो (धातुओं व

पत्थर) को क्षति पहुँचना

5/25

मोटरवाहन व पेट्रोलियम उद्योग

भापशक्ति संयंत्र निर्माण गतिविधियाँ, धातु कर्मीय प्रक्रियायें मोटर वाहन

वस्त्र उद्योग व कालीन बुनने वाला उद्योग

• श्वसन समस्यायें • कैंसर उत्पन्न करने वाले गुण

दृश्यता में कमी होना श्वसन समस्यायें • लाल रक्त कणिकाओं के विकास में व्यवधान उत्पन्न करता है व फेफड़े के रोग व कैंसर उत्पन्न करता है।

धूम (धुआँ कुहरा) निर्माण के कारण दृश्यता में हास (कमी होना) व रोगियों में दमा रोग की बढ़ोत्तरी होती है।

•• फेफड़ों के विकार

191

स पयो

टिप्पण

चित्र 10.1: धुंआ उगलली हुई चिमनी-डीजल गाड़ी (ट्रक/बस) धुएं का बादल उड़ाता हुआ

10.3.3 वायु प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण (i) भीतरी (इनडोर) वायु प्रदूषण

भवनों के गलत डिजाइन से वायु का संचार ठीक से नहीं हो पाता और बन्द स्थानों की वायु प्रदूषित होती है। पेन्ट, कालीन फर्नीचर आदि कमरे में

मुद्दे

पर्यावरण विज्ञान उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रम

Compound, VOCs) उत्पन्न करते हैं। रोगाणुनाशी पदार्थ, धूमीकरण आदि के प्रयोग से हानिकारक गैस पैदा होती है। अस्पतालों के कचरे में जो रोगजनक तत्व पाये जाते हैं वह हवा में रोग के बीजाणु के रूप में रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप अस्पतालों से संक्रमण आता है या यह एक व्यवसायजन्य स्वास्थ्य बाधा है। भीड़ भरे स्थानों में, गन्दी बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और जैविक ढेर टिप्पणी को जलाने से बहुत धुआं उठता है जो बच्चे और महिलाएँ धुएँ के सीधे और अधिक सम्पर्क में आते हैं, उनको श्वसन समस्याएँ बहुत और भीषण होती हैं जिसमें नाक का बहना, खांसी, खराब गला, सांस लेने में कठिनाई आवाज के साथ श्वास और छींक आदि की समस्याएँ सम्मिलित हैं।

(ii) भीतरी प्रदूषण का निराकरण और नियंत्रण

6/25

लकड़ी और गोबर के उपलों के प्रयोग के स्थान पर स्वच्छ ईंधन जैसे जैविक गैस (बायोगैस), मिट्टी का तेल या बिजली का प्रयोग करें। लेकिन बिजली की आपूर्ति बहुत सीमित होती है। खाना बनाने के लिए सुधारित स्टोव, धूम्र रहित चूल्हों की उष्मीय क्षमता अधिक होती है और धुंए जैसे प्रदूषकों का निकास भी कम होता है। घर का नक्शा ऐसा होना चाहिये जिसमें रसोईघर में शुद्ध हवा का आना-जाना ठीक ढंग से हो, उचित वायु संचार हो। बायोगैस और सी. एन. जी. (संपीडित प्राकृतिक गैस) के प्रयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए। पेड़ों की ऐसी प्रजातियाँ जो कम धुआँ देती हैं जैसे बबूल (एकेशिया निलोटिका) लगाना चाहिये और उनकी लकड़ी का ही उपयोग करना चाहिये। लकड़ी का कोयला (चारकोल) का उपयोग अधिक सुरक्षित है। घर के अंदर या कमरों में जैविक कूड़े से जो प्रदूषण होता है उसे ढककर रखने से कम किया जा सकता है। भीतरी (Indoor) प्रदूषण को रोकने के लिये कूड़े का पृथक्करण, स्रोत पर ही पहले से कूड़े को उपचारित करना, और कमरों की शुद्धता करना आदि बहुत सहायक तरीके हैं।

(iii) औद्योगिक प्रदूषण का निराकरण और नियंत्रण

औद्योगिक प्रदूषण को निम्न विधियों द्वारा काफी हद तक रोका जा सकता है:

(क) ऊर्जा संयंत्रों और फर्टिलाइजर संयंत्रों में स्वच्छ ईंधन का प्रयोग किया जाय। जैसे एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) यह सस्ती होने के साथ ही पर्यावरण सहयोगी भी है। (ख) पर्यावरण सहयोगी औद्योगिक प्रक्रियाओं को अपनाएं जिससे प्रदूषकों और हानिकारक

अपशिष्टों का निकास कम हो।

(ग) ऐसी मशीनों को लगाया जाय जो कम प्रदूषकों का निष्कासन करें जैसे फिल्टर, इलैक्ट्रोस्टेटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic precipitator) इनरशियल कलैक्टर्स (Intertial collectors), स्क्रबर, ग्रेवल बैंड फिल्टर या ड्राइ स्क्रबर इनका विस्तृत वर्णन नीचे किया जा रहा है।

(i) फिल्टर- गैस की धारा से ही ठोस कणों को फिल्टर दूर कर देते हैं। फिल्टर कपड़े से, रेत से, बड़ी छलनी से या फैल्ट पैड से बने होते हैं। फिल्टर की बैगहाउस पद्धति सर्वाधिक प्रचलित है और यह सूत या सिंथेटिक कपड़े (कम ताप के लिये) से बने होते हैं। उच्च ताप के लिये ग्लासक्लाथ का प्रयोग होता है।

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