0 ओजोन परत में छेद कारण और ओजोन की क्षति से होने वाली हानि – Soft Study Akash Kumar

ओजोन परत में छेद कारण और ओजोन की क्षति से होने वाली हानि

ओजोन परत में छेद कारण और ओजोन की क्षति से होने वाली हानि

समतापमंडल में एक ओजोन परत होती है जो सूर्य से निकलने वाली तीव्र पराबैगनी किरणों (अल् बॉयलेट) के विकिरण (रेडियेशन) से हमारी रक्षा करती है। रसायनों जैसे कार्बन (सीएफसी) जिसका उपयोग फ्रिज, एअरकंडीशनर, अग्निशामक यंत्रों, सफाई करने वाले विलायकों, एअरोसोल्स (सुगंधित द्रव्यों की स्केनो औषधियों कीटनाशकों से निकलने वाली क्लोरीन से आवान परत को क्षति पहुंचती है क्योंकि CFCs ओजोन पर्त में फैल आजीन कणों को ऑक्सीजन (O) में बदल देता है। ओजोन की मात्रा में कमी होती जाती है और यह IV वरणों के प्रवेश को नहीं रोक सकती है। इसके कारण आर्कटिक (उत्तर क्षेत्र और अटाकाटक (दक्षिण

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पर्यावरणीय प्रदूषण

मॉड्यूल – 4 समसामयिक पर्यावरणीय मुद्दे

ध्रुवीय क्षेत्रों के ऊपर आजार परत या दाल पतली होती जा रही है। इसको हो ओजोन छिद्र के नाम से जानते हैं। इसके कारण पराबैगनी किरणों के विकिरण का पृथ्वी पर मार्ग खुल जाता है जिसका परिणाम है भूप के कारण झुलसना (सनबर्ग), आखों में मोतियाबिंद और अंधापन, जंगलों में कम उत्पादन आदि “मान्ट्रियल प्रोटोकॉल” जिसमें 1990 में सुधार किया गया था, उसमे ओजोन पर्व को हानि पहुंचाने वाले CFCS को पूर्ण रूप से हटाने का निश्चय किया गया था।

10.5 भूमंडलीय ऊष्मन (ग्लोबल वार्मिंग) और हरित ग्रह प्रभाव

टिप्पणी

कार्बन मीथेन, नाइट्स ऑक्साइड, जाप कण और क्लोरोफ्लूरोकार्बन जैसी वायुमंडलीय गैसें जयपृथ्वी से बाहर जाने वाले अवरक्त (Infra-red, इंफ्रारेड) विकिरणों का मार्ग बाधित कर देने में समर्थ होती हैं। पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित अवस्क्त चिकिरण (रेडिएशन) इन गैसों के बीच से नहीं निकल सकता। जिसके कारण यह नीचे ही फंसकर ऊर्जा या वातावरण में गर्मी में परिवर्तित जा जाता है। इस प्रकार से वैश्विक वायुमंडल के तापमान में वृद्धि हुई है। तापमान की वृद्धि को ग्रीन हाऊस की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है। वानस्पतिक बगीचों में इन गैसों को ग्रीनहाउस (Green House) गैसों के नाम से जाना जाता है और इनके द्वारा उत्पन्न उष्णता को ग्रीनहाऊस प्रभाव कहा जाता है। यदि शताब्दी के बदलने के साथ इन ग्रीन हाउस गैसों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो तापमान 50 तक बढ़ सकता है। इसके कारण ध्रुवीय बर्फ पिघलने से समुद्रों में जल स्तर बढ़ जायेगा जिसके कारण तटीय तूफान बढ़ जाएंगे, तटीय क्षेत्रों और परिवत्रों जैसे जलमग्न क्षेत्र और दलदल को भी क्षति होगी।

10.6 ध्वनि प्रदूषण (NOISE POLLUTION)

ध्वनि एक सबसे अधिक व्यापक प्रदूषक है। संगीतमय पड़ी दिन में मधुर लग सकती है, परन्तु रात को सोते समय तकलीफ दे सकती है। शोर को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं को ध्यान या “कभी ऐसी ध्वनि जो सुनने के लिए रुचिकर न हो।” उधागा का शोर जैसे पत्थरों का काटना और कूटना, स्टील को तथा कर पीटना (लाहार का काम) लाउडस्पीकर, अपना सामान बेचने के लिए विक्रेता का चिल्लाना भारी परिवहन वाहनों के चलने से रेलगाड़ियाँ और हवाई जहाज आदि कष्टदायक ध्वनि उत्पन्न करते हैं जिससे रक्तचाप का बढ़ना क्रोष आना, कार्य कुशलता में कमी, श्रवण शक्ति का क्षीण होना आदि परेशानियाँ पैदा हो सकती है। प्रारम्भ में यं अल्पकाल के लिये हो सकते हैं परन्तु यदि ध्वनि का स्तर तीव्र हो रहा है तो स्थायीरूप से भी हो सकती है। अत्यधिक कोलाहल पर नियंत्रण करना अत्यन्त आवश्यक है। धानि की उच्चता का स्तर डेसिबल (डीवी) में नापा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएच.ओ.) ने ध्वनि का स्तर दिन में 45 डीबी और रात्रि में 35 जीबी निश्चित किया है 85 डीबी से उच्च स्तर पर होने वाली ध्वनि हानिकारक है। तालिका संख्या 104 मे कुछ सामान्य गतिविधियों की नि की गई है।

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स्रोत

चुपचाप बातचीत

उच्च आवाज में बातचीत

टिप्पणी

घास काटने की मशीन

हवाई जहाज की ध्वनि

बोर संगीत मोटरसाइकिल

तीव्रता

20-30 JB

60 dB

60-80dB

90-120 JB

120dB

105 JB

स्रोत

तालिका 10.4: कुछ ध्वनि स्रोत और उनकी

यातायात ध्वनि

रेडियो संगीत टक भारी वाहन ट्रक अवरक्ष यान का प्रक्षेपण जेट इंजन

माध्यमिक पाठ्यक्रम

50-60 dB.

60-90 dB

90-100 dB

140-179 dB

140 dB

10.6.1 ध्वनि प्रदूषण के स्रोत

ध्वनि प्रदूषण को समस्या निरन्तर बढ़ने वाली समस्या है। सभी मानव गतिविधियाँ भिन्न भिन्न स्वरा पर ध्वनि प्रदूषण को बावा देती है। ध्वनि प्रदूषण के अनेक स्रोत है जो घर के अन्दर और बाहर दोनों ही जगह है।

भीतरी स्रोत (इनडोर स्रोत) झसमें रेडियो, टेलीविजन, जनरेटर, बिजली के पंखे, एयर कूलर, एयरकंडीशनर विभिन्न मरेलू उपकरण और पारिवारिक विवाद से उत्पन्न शोर निहित है। शहरों में ध्वनि प्रदूषण अधिक है क्योंकि शहरों में आबादी बनी है. उद्योग अधिक है और यातायात जैसी गतिविधियाँ अधिक है। अन्य प्रदूषकों की भारत शोर भी औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और आधुनिक सभ्यता का एक उप-उत्पाद (By-product) है। .
10.6.2 ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

ध्वनि प्रदूषण सबसे अधिक परेशानी और झल्लाहट पैदा करता है। इससे नौद में विघ्न पड़ता है, उच्च रक्तचाप (Hypertension) हो सकता है भावात्मक समस्याएँ जैसे क्रोध, मानसिक अवसाद और उत्पन्न हो सकता है। अनि प्रदूषण से व्यक्ति की कार्य कुशलता और क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

10.63 ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम और नियन्त्रण

निम्न बातों को अपनाने से ध्वनि प्रदूषण को निमंत्रित या फिर कम किया जा सकता है ● गाड़ियों के उचित रखरखाव और अच्छी बनावट से सड़क के शोर को कम किया जा सकता है।

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पर्यावरणीय प्रदूषण

●ध्वनि कम करने के उपायों में ध्वनि टीलों का निर्माण, ध्वनि को क्षीण करने वाली दीवारों का निर्माण और सड़कों का उचित रखरखाव और सोधी सपाट सतह होना आवश्यक है।

● रेल इंजनों की रोट्रोफिटिंग (Retrofining), रेल की पटरियों को नियमित वैल्डिंग और ब से चलने वाली रेलगाड़ियों का प्रयोग या कम शोर करने वाले पहियों का प्रयोग बढ़ाने से रेलगाड़ियों द्वारा उत्पन्न शोर में भारी कमी आयेगी।

● हवाई यातायात के ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए वायुजनों के उड़ने और उतरने के समय उचित ध्वनि रोधक लगाने और ध्वनि नियमों को लागू करने की आवश्यक है। ● औद्योगिक ध्वनियों को रोकने के लिये भी ऐसे स्थानों पर जहां जेनरेटर हा पर ऐसे क्षेत्र जहां

टिप्पणी

पर बहुत शोर वाली मशीने हो धनिसह उपकरण लगाने चाहिये। • बिजली के औजार, बहुत तेज संगीत और लैण्डमूवर्स, सार्वजनिक कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर का प्रयोग आदि रात्रि में नहीं करना चाहिये। हाने का प्रयोग, अलार्म और ठंडा करने वाले मशीनों का प्रयोग सीमित होना चाहिये। ऐसी आतिशबाजी जो शोर करती है और प्रदूषण

फैलाती है उनका प्रयोग सीमित करना चाहिये जिससे शार और वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।

• घने पेड़ों की हरियाली (ग्रीन बैल्ट) भी ध्वनि प्रदूषण को कम करने में सहायक होती है।

पाठगत प्रश्न 10.2

है और इसे किस इकाई

नापा जाता है?

2. ध्वनि प्रदूषण के दो हानिकारक प्रभाव बताइये।

3. ध्वनि प्रदूषण के दो महत्वपूर्ण भोतरी और बाहरी स्त्रोत बताइये। इनमें से प्रत्येक प्रकार के प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है?

10.7 जल प्रदूषण

जल में अनिश्चित या अवांछनीय पदार्थों का मिला होना या पाया जाना ही जल प्रदूषण कहलाता है। जल प्रदूषण एक सबसे गम्भीर पर्यावरणीय समस्या है। जल प्रदूषण मानव की अनेक गतिविधियों

के कारण होता है जैसे औद्योगिक, कृषि और घरेलू कारणों से होता है। कृषि का कूड़ा कचरा जिसमें

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टिप्पणी

विज्ञान उता माध्यमिक पाठ्यक्रम

मायनिक उर्वरक और कीटनाशक मिले होते हैं। औद्योगिक बहिस्वानों के साथ-साथ विषालु पदार्थो का मिलना, मानव और जानवरों का निष्कासित मलजल सभी प्रदूषण का कारण जल प्रदूषण के प्राकृतिक कारणों में मुदा अपरदन, चट्टानों से खनिजों का रिसाव और जैव पदार्थों का सड़ना निहित है। नदियाँ झरने, सागर, समुद्र, ज्वारनदमुख भूमिगत जल स्त्रोत बिंदु और गैर बिंदु धोतों के कारण प्रदूषित होते हैं। जब प्रदूषक किसी निश्चित स्थान से नालियों और पाइयों के द्वारा पानी में गिरता है तो वह बिंदु स्रोत प्रदूषण (Point source pollution) कहलाता है। निश्चित स्थान फैक्टरी पॉवर प्लाट सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हो सकते हैं। इसके विपरीत गैर विन्दु स्रोत (Non-point source) में प्रदुषक बढ़ और विस्तृत क्षेत्र से आते हैं जैसे खेतों, चारागाहा, निर्माण स्थलों खाली पड़ी खदानों और गड्ढों, सड़कों और गलियों से बहकर आने वाला कूड़ा सम्मिलित है।

10.7.1 जल प्रदूषण के स्रोत

प्रदूषित जल से उत्पन्न होने वाले रोगा और अनेको अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य स्रोत जल प्रदूषण ही है। खेतों से बहकर आए पानी से आने वाले तलछट और अनुपचारित या क रूप से उपचारित सीवेज का निष्कासन और औद्योगिक कचरा, जीस कचरा या धूल का निष्कासन जल स्रोतों के अन्दर का उनके आसपास करना गम्भीर रूप से जल प्रदूषण का कारण है। पानी को पारदर्शिता इस गन्दगी के कारण कम हो जाती है जिससे पानी के अन्दर प्रकाश की किरणों का

पहुँचना बहुत कम हो जाता है और फलस्वरूप जलीय पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण में भी कमी आ. जाती है।

(d) कीटनाशकों और अकार्बनिक रसायनों के कारण प्रदूषण

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